Free sex chating in mumbai

by  |  19-Jan-2020 18:58

हम अब तक यही सोच रहे थे कि जाकिर भाई इस्लाम की खिदमत में जी जान से हाजिर हैं.

इसके लिए उन्होंने न जाने कुरान, हदीस, सीरत, वेद, पुराण, उपनिषद्, भगवद गीता, मनुस्मृति, महाभारत, तौरेत, बाईबल, धम्म पद, गुरुग्रंथ साहिब, और न जाने क्या कुछ न सिर्फ पढ़ डाला है बल्कि याद भी कर लिया है.

असल में भी जब जाकिर भाई कुरान, हदीसों और दूसरी किताबों के हवाले (प्रमाण) बिना किसी किताब की मदद से केवल अपनी सनसनीखेज याददाश्त से देते हैं तो मौके पर ही हज़ारों को अपना मुरीद बना लेते हैं.

हम खुद जाकिर भाई की अधिकतर बातों से इतेफाक (सहमति) नहीं रखते थे लेकिन इस्लाम के लिए जाकिर भाई की कोशिशें काबिल ए तारीफ़ जरूर समझते थे.

इससे बढ़कर यह कि जाकिर भाई ने कहीं भी अपनी किसी किताब, तक़रीर, या लेख में इन हजरत अब्दुल हक का नाम भी नहीं लिया, उनका शुक्रिया अदा करना तो बहुत दूर रहा.

इस तरह चोरी से किसी की चीज पर हक जता कर अपने नाम से पेश करने की सजा शरियत में क्या है, यह तो हम आगे लिखेंगे.

इसके लिखने वाले जनाब मौलाना अब्दुल हक विद्यार्थी हैं, जिन्होंने इसे १९३६ में लिखा था. हमें झटका सा लगा.जाकिर भाई के सारे दावे लफ्ज़ दर लफ्ज़ (शब्दशः) इस किताब में मिलने लगे.

Community Discussion